बवासीर लक्षण कारण इलाज और परहेज

बवासीर लक्षण कारण इलाज और परहेज

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बवासीर लक्षण कारण इलाज और परहेज

खानपान की हुई बिगड़ी आदतों के कारण ही बवासीर जिसे के पाइल्स या हेमोर्राइड भी कहते हैं, से कई लोग परेशान हैं। अव्यवस्थित दिनचर्या और कार्यशैली भी काफ़ी हद तक हमारी इस परेशानी के लिए ज़िम्मेदार है। बवासीर में रोगी असहनीय दर्द हो सकता है, जो के काफ़ी पीड़ादायक होता है। बवासीर में रोगी के मलाशय के आस-पास के भाग की नसों में सूजन आ जाती है और गांठे भी पड़ जाती हैं। आज इस लेख में आपको बवासीर का इलाज आयुर्वेदिक से निर्मित दवाओं और योग के आधार पर ही बताया जा रहा है। (आप चाहे तो किसी अच्छे सलाहकार से भी सलाह ले सकते है)|

बवासीर रोगी के गुदा के अंदर या बाहर भी हो सकता है। अंदर होने वाला बवासीर पर मस्सा अंदर की ओर को होता है, जिससे नसों की सूजन दिखती और महसूस होती है। इसके विपरीत रोगी को बाहर वाले बवासीर में सूजन गुदा द्वार के बाहर की तरफ ही होती है, इसलिए इसे देखा जा सकता है। कब्ज़ बवासीर होने के प्रमुख कारणों में से एक है।

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बवासीर का इलाज | Treatment of Piles

पेट साफ़ करते वक़्त लगने वाले ज़ोर से अंदर वाले बवासीर के मस्से बाहर की ओर को आ जाते हैं, जिससे रोगी को काफी पीड़ा होती है। कड़े मल के द्वारा मस्सों के छिलने का डर बना रहता है, जिससे के ख़ून आ सकता है और घाव भी बन सकता है। बाहर वाले बवासीर में मस्से बाहर की ओर ही को होते हैं, जिससे रोगी को बैठने में परेशानी और बहुत दर्द होता है। इस पर हल्की जलन और सूजन महसूस होती है। कब्ज़ से परेशान रोगी के यह मस्से फट भी सकते हैं, जिससे के ख़ून निकलता देखकर मरीज़ डर जाता है।

एलोपैथिक इलाज में इसकी सर्जरी की जाती है, जिसमें बहुत अधिक खर्च आता है। लेकिन कई बार सर्जरी के सफल न होने से बवासीर की समस्या फिर से झेलनी पड़ती है। आयुर्वेदिक दवाओं से बवासीर का इलाज आसानी से किया जा सकता है।

बवासीर का इलाज के तरीके | Ways of the Treatment of Piles

1- बवासीर का आयुर्वेदिक द्वारा उपचार

2- बवासीर का होम्योपैथिक द्वारा इलाज

3- बवासीर का इलाज बाबा रामदेव की औषधि द्वारा

4- बवासीर का इलाज योग अभ्यास द्वारा

बवासीर के लक्षण | Symptoms of Piles

  1. मल त्याग समय पीड़ा होना और रक्त स्रावहोना
  2. गुदा द्वार के आस पास सूजन, दर्द और जलन होना
  3. ख़राब हाज़मा, कब्ज और भूख में कमी होने से पेट में गैस की समस्या रहती है
  4. शारीरिक कमज़ोरी का होना और चेहरे पर सूजन रहना

आयुर्वेद में बवासीर का उपचार | Ayurvedic Treatment of Piles

  1. इसमें रोगी को नियमित व्यायाम अति आवश्यकता होती है।
  2. फलों का ताज़ा रस पिए और सब्ज़ियों का सूप पिए, यह दोनों ही रोगी के इल्ये बहुत फ़ायदेमंद है।
  3. रोज़ाना 3 से 4 लीटर पानी पीने की आदत डाले, यह आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा|
  4. अगर आपको ख़ूनी बवासीर है तो नींबू को काटपर उस पर पिसा हुआ कत्था लगाकर रात भर खुली छत में रख दे और सुबह जगते ही इनका रस निकालकर पी लें। इस कार्य को 15 मिनट का समय दे। उदड़ की दाल और मांस और मछली से परहेज़ करना ही बेहतर है। इस प्रयोग को आप 5 दिन कर और इसके बाद आपको स्वयँ ही फायदा दिखने लगेगा|
  5. एक केले को बीच से काट ले और उसपर पिसा हुआ कत्था छिड़ककर रात भर खुली छत पर रख दे और सुबह जागते ही इसका सेवन कर ले। एक सप्ताह में ही आपको अच्छा परिणाम दिख जाएगा|
  6. 10 ग्राम धुले हुए ताज़ा मक्खन और तिल को चबाकर खाने से ख़ूनी बवासीर में काफी राहत मिलती है|
  7. 50 ग्राम बड़ी इलायची को तवे पर अच्छे से भून लीजिए। बाद में ठंडी करके इसका पाउडर बना लें। और फिर हर रोज़ सुबह ख़ाली पेट यह भुना चूर्ण लेने से आपकी कब्ज़ की शिक़ायत दूर हो जाती है।
  8. रसेदार खाद्य वस्तुओं वाले भोजन को अपने खाने में अवश्य शामिल करे| नींबू, सेब,दही और संतरा आदि इस बीमारी में काफ़ी लाभकारी है।
  9. 1 चम्मच शहद में एक चौथाई चम्मच दालचीनी के पाउडर को मिलाकर खाने से बवासीर का इलाज कर पाना संभव हो जाता है।
  10. 50 ग्राम रीठे को तवे पर रख ले और गैस चालू कर ले। आधे घंटे बाद यह रीठे भस्म में तब्दील हो जाएंगे। और फिर इस भस्म को ठंडा होने के बाद अच्छे से पीसकर बारीक़ कर लें। अब 20 ग्राम रीठे की भस्म को 10 ग्राम सफेद कत्था और 3 ग्राम कुश्ता फोलाद में पीसकर इसका चूर्ण बना ले| आप 1 ग्राम चूर्ण को 20 ग्राम मक्खन और 1 गिलास गरम दूध के साथ रोजाना लें। यह उपाय आपके द्वारा 15 दिन करने से आपकी ख़ूनी बवासीर का इलाज हो जाएगा।

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बवासीर में परहेज़ | What to Avoid in Piles

  1. गुड़, नॉन-वेज, आम और अंगूर बिलकुल न खाएं।
  2. कब्ज़ की समस्या को न बनने दें।
  3. उड़द की दाल और मांस और मछली बिलकुल न खाएं।
  4. खट्टे और मिर्च मसालेदार और चटपटे व्यंजनों को खाना बंद कर दे तो बेहतर होगा।
  5. बवासीर का इलाज पूरी तरह से होने तक शराब बिलकुल न पिएं। कॉफ़ी और चाय की मात्रा भी सीमित कर दे तो बेहतर होगा|

बवासीर के लिए मरहम | Paste for Piles

  1. 6 ग्राम कपूर, 3 गोली सल्फाडायजीन और 6 ग्राम बोरिक एसिड को मिलाकर बिलकुल बारीक़ पीस लें। इसे आप 50 ग्राम वैसलीन में मिलाकर इसका मिश्रण तैयार कर ले। दिन में 2 बार रोगी इसे मस्सों पर अवश्य लगाये|
  2. बवासीर के मस्सों पर रोगी द्वारा अरंडी का तेल मलने से भी राहत मिलती है।
  3. जीरे को पीसकर रोगी द्वारा मस्सों पर लगाने से भी आराम पहुंचता है।

होम्योपैथ में बवासीर का इलाज | Homeopathy Treatment for Piles

होम्योपैथ एक बहुत ही जानी मानी चिकित्सा पद्धति है, होम्योपैथ में बवासीर का इलाज भी मौजूद है। इसके लिए कुछ दवाएं अग्रलिखित हैं:

  1. Hamamelis
  2. Graphites
  3. Ratanhia
  4. Nux Vomica
  5. Aesculus

ऊपर लिखी दवाओं के इस्तेमाल से पूर्व आप होम्योपैथ डॉक्टर से परामर्श अवश्य कर लें। साथ ही किन चीजो से परेहज करना है वो भी जान ले|

बाबा रामदेव की दवा | Medicine by Baba Ramdev

बवासीर के इलाज के लिए बाबा रामदेव जी की दवा का प्रयोग भी काफी प्रचलन में है। इस दवा का नाम है दिव्य अर्श कल्प वटी। यह दावा आपको किसी भी पतांजली स्टोर पर आसानी से मिल जाएगी।(आप चाहे तो बाबा रामदेव के स्टोर में बैठे डॉक्टर से मुफ्त सलाह भी ले सकते है).

सेवन की विधि | How To Eat

– दिव्य अर्श कल्प वटी की 2 गोलियां को दिन में दो बार लेना चाहिए। सुबह में ख़ाली पेट और रात को खान खाने से पहले इसका सेवन कर ले|

– आप यह दवा पानी, एलो वेरा जूस या लस्सी के साथ भी ले सकते हैं।

योग द्वारा बवासीर का उपचार | Yog for the Treatment of Piles

प्राणायाम योह अनेक मर्ज़ों की एक दवा है। बवासीर की परेशानी में भी प्राणायाम बहुत लाभ पहुंचाता है। साथ ही कपालभाती और अनुलोम विलोम करने से भी पाइल्स की परेशानी में बहुत जल्द आराम मिलता है।

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