कब होता है भारत में डेंगू बुखार का मौसम

कब होता है भारत में डेंगू बुखार का मौसम

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कब होता है भारत में डेंगू बुखार का मौसम

मौसम में परिवर्तन के साथ ही जहां एक ओर बढ़िया और सुहावना मौसम होता है और वहीं दूसरी ओर बिमारिया भी फैलने लगती हैं। और बारिश के मौसम में बीमारियां कोई छोटी-मोटी बीमारी नहीं नहीं बल्कि डेंगू बुखार, मलेरिया, चिकनगुनिया इत्यादि जैसी खतरनाक ती हैं। डेंगू का प्रकोप ज्यादातर गर्म और गीले क्षेत्र में फैलता है और बारिश के मौसम में तो ऐसी ही कई अन्य बीमारियों के होने की सम्भावना भी अधिक बढ़ जाती हैं। दोस्तों, आइए आज जानते है के  भारत में डेंगू बुखार के प्रकोप के बढ़ने का क्या कारण है|

डेंगू बुखार का वायरस आमतौर पर बारिश के मौसम में यानी के जून से सितंबर और अक्‍टूबर के बीच ही फैलता है। और इसका सबसे बड़ा कारण यह है के भारत में बदलता हुआ तापमान, और इसीलिए डेंगू बुखार का मौसम भारत में बारिश के साथ ही शुरू हो जाता है।

आमतौर पर भारत में जून कें अंत में बारिश शुरू हो ही जाती है और जुलाई, अगस्त, सितंबर इन तीन महीनों में डेंगू बुखार सबसे अधिक फैलता है, क्योंकि सम्पूर्ण भारत में सबसे अधिक बारिश इन्ही तीन महीनों के बीच होती हैं।

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भारत में मौसम का उतार-चढ़ाव तो लगातार चलता ही रहता है,  और कभी-कभी बहुत अधिक बारिश होती है तो कभी-कभी बहुत अधिक गर्मी या ठंडी हो जाती है| और ऐसे में डेंगू के मच्छरों की पैदाइश अत्यधिक बढ़ जाती हैं।

इन महीनों में लगातार बारिश होने और मौसम में उतार-चढ़ाव से काफी चिपचिपाहट और उमस होती है और इसी उमस और चिपचिपाहट की वजह से ही डेंगू बुखार के फैलने की संभावना भी बहुत बढ़ जाती है।

डेंगू का प्रभाव हर क्षेत्र में अलग-अलग तरीके से होता है क्योंकि मौसम में उतार-चढ़ाव और बारिश का कभी किसी एक क्षेत्र में आना तो कभी किसी दूसरे में आना ही इसका मुख्य कारण है।

डेंगू मच्छ़र यानी के एडिस एजिप्टी मादा मच्छर आमतौर पर शाम के समय ही काटता है ।

भारत में जैसे-जैसे मौसम बदलता रहता है, वैसे ही लोगों को बुखार की शिकायत होने लगती हैं। और हाल ही में दिल्ली में डेंगू बुखार के बहुत नये मामले सामने आने लगे हैं।

  • डेंगू से बचने के लिए सावधानी बरतनी बहुत ही आवश्यक हैं।
  • हालांकि डेंगू बुखार का इलाज संभव है, लेकिन इसके साथ ही डेंगू बुखार से जान-जोखिम का खतरा भी रहता है।
  • डेंगू की बीमारी से बचने के लिए बेहद ज़रूरी है कि आप बदलते मौसम में सामान्य बुखार को बिलकुल भी नजरअंदाज न करें बल्कि उसका सही तरीके से जल्द से जल्द उपचार करवाएं।
  • तीन दिन या इससे अधिक दिन तक बुखार रहने पर लापरवाही बिलकुल न बरतें बल्कि जल्द ही डॉक्टर्स से संपर्क करें और इलाज करवाए।
  • डेंगू बुखार आमतौर पर मच्छर के काटने से ही फैलता है। लेकिन ध्यान रख एके डेंगू एक संक्रमित बीमारी है।
  • यह बीमारी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलती लेकिन उस मच्छर के काटने से अवश्य हो सकता है जिसने के किसी संक्रमित व्यक्ति को काटा है।
  • डेंगू का मच्छर बरसात के मौसम में ही ज्यादा फैलते हैं और यह उन जगहों पर बहुत तेज़ी से फैलते हैं जहां पर पानी जमा हो। फिर चाहे पानी साफ ही क्यों न हो।
  • जिन लोगों का इम्‍यून सिस्टम बहुत कमजोर होता है उन्हें या डेंगू बुखार अत्यधिक प्रभावित करता है।
  • डेंगू बुखार में रोगी को बहुत अधिक ठंड के साथ-साथ कंपकंपी और तेज बुखार भी होने लगता है।
  • डेंगू बुखार में रोगी के शरीर के सभी अंगों में दर्द रहता है और साथ ही रक्तचाप सामान्य से बहुत कम हो जाता है।
  • डेंगू बुखार के कारण रोगी को अत्याधिल कमजोरी, सरदर्द और गले में दर्द इत्यादि जैसी समस्याएं हो जाती हैं।
  • डेंगू का बुखार वैसे तो चार से पांच दिन तक ही रहता है लेकिन अगर सही समय पर इसका ईलाज ना करवाया जाये तो इसे ठीक होने में अधिक वक्त भी लग सकता है।
  • इसके साथ ही इस बुखार से हुई कमजोरी को भरने में भी काफी समय लगता हैं।

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जैसे-जैसे मौसम बदलेगा वैसे-वैसे डेंगू का प्रकोप भी उतना ही अधिक बढ़ता जाएगा। ऐसे में हमेशा कोशिश करें की घर, दफ्तर या आसपास कहीं भी गंदगी न रहने दें और पानी को कभी भी इकट्ठा न होने दें।

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