सोशल मीडिया का याद्दाश्त और रिश्‍तों पर प्रभाव

सोशल मीडिया का याद्दाश्त और रिश्‍तों पर प्रभाव

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सोशल मीडिया का याद्दाश्त और रिश्‍तों पर प्रभाव

फेसबुक (facebook) और ट्विटर (twitter) का प्रयोग भले ही आपको दोस्तों (friends) के संपर्क में रहने के लिए अच्‍छा लगता हो। लेकिन इनका ज्‍यादा इस्‍तेमाल आपकी याद्दाश्त (memory) पर विपरीत असर डालता है। हाल ही में हुए एक शोध के मुताबिक सोशल मीडिया (social media) की लत आपको भुलक्‍कड़ बना सकती है।

अध्‍ययन के मुताबिक सोशल मीडिया (social media) का अधिक इस्‍तेमाल याद्दाश्त (memory) पर विपरीत असर डालता है। ऐसे लोगों के दिमाग (brain) में महत्‍वपूर्ण जानकारी सुरक्षित (safe) नहीं रह पाती। इससे उन्‍हें अपने दैनिक जीवन (life) में परेशानी होती है। स्‍टॉकहोम के केटीएच रॉयल इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी के शोधकर्ताओं के मुताबिक दिमाग (brain) खाली समय में जानकारियों को सुरक्षित (safe) करने का काम करता है।

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उन्‍होंने बताया कि सोशल मीडिया (social media) के इस युग में लोग हर समय ऑनलाइन (online) रहते हैं या अन्‍य किसी काम में लगे रहते हैं, इससे उनका दिमाग (brain) हर समय व्‍यस्‍त रहता है और उसे आराम भी नहीं मिल पाता। ऐसे में उनके दिमाग (brain) को जानकारियों को सुरक्षित (safe) रखने की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय नहीं मिल पाता। जिसका सीधा असर उनकी याद्दाश्त (memory) पर पड़ता है।

ऐसे में शोधकर्ताओं की सलाह (suggestion) है कि सोशल मीडिया (social media) के आदी लोगों को बीच-बीच में ऑफलाइन होते रहना चाहिए। शोधकर्ता इरिक फ्रांसेन के मुताबिक सोशल मीडिया (social media) के अधिक इस्‍तेमाल से मस्तिष्‍क पर जानकारियों का बोझ बढ़ जाता है। जिससे दिमाग (brain) कम जानकारियों को ही लंबे समय तक याद रख पाता है।

फ्रांसेन के मुता‍बिक मनुष्‍य के दिमाग (brain) में स्‍मृतियों के दो कोष होते हैं, पहला अल्‍पकालिक और दूसरा दीर्घकालिक। कोई भी सूचना पहले अल्‍पकालिक स्‍मृति में आती है, उसके बाद यह दीर्घकालिक स्‍मृति में जाती है।

सोशल मीडिया का रिश्‍तों पर प्रभाव | Social Media Effect on Relations

फेसबुक (facebook) , ट्विटर (twitter) जैसी सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स (sites) और विभिन्‍न ऐप्‍लीकेशन आज लोगों की जिंदगी (life) का हिस्‍सा बन गए हैं। यदि इन सभी से आदमी थोड़ी देर के लिए भी दूर होता है तो वह बेचैन हो जाता है। शुरूआत में सोशल मीडिया (social media) यानी न्‍यू मीडिया का मकसद लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने (fixing) के साथ ही संचार माध्यम को मजबूती देना था। अपने इस मकसद में सोशल मीडिया (social media) को सफलता भी मिली। लेकिन साथ ही इसने सामाजिक संबंधों (relation) को भी प्रभावित किया है। हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, दूसरे पहलू के रूप में सोशल मीडिया (social media) ने लोगों के संबंधों (relation) में दखल किया है। बात करते हैं सोशल मीडिया (social media) और इसके सामाजिक संबधों पर पड़ने वाले असर के बारे में।

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सोशल मीडिया का समाज में दखल | Social Media and Society

सोशल नेटवर्किंग साइट (site) अधिकांश लोगों के जीवन (life) का हिस्सा बन चुकी हैं। शुरूआत में इस तरह की वेबसाइटों ने आपसी संबंधों (relation) को मजबूती दी, लेकिन अब आकर यह रिश्‍तों में समस्‍या पैदा करने का भी कारण बन गई हैं। इसलिए लॉगइन करने से पहले और अपनी निजी जिंदगी (life) को दुनिया के साथ साझा करने से पहले एक बार अपने साथी (partner) से बात कर लें। सोशल नेटवर्किंग किसी रिश्ते (relation) में असंतोष का कारण बन सकती है। जब आपका साथी (partner) आपसे ज्यादा सोशल नेटवर्किंग साइट (site) पर समय बिताता है तो आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचती है। ऐसे में इसका दुष्‍प्रभाव यह होता है कि व्यक्ति (person) खुद को उपेक्षित महसूस करने लगता है।

आज हर उम्र के लोग फेसबुक (facebook)  और ट्विटर (twitter) जैसी सोशल नेटवर्किंग साइट (site) से जुड़े हैं। सोशल नेटवर्किग (social networking) का दौर माई स्पेस से शुरू होकर फेसबुक (facebook)  व ट्विटर (twitter) तक पहुंच चुका है। पहले इन साइट्स (sites) का इस्तेमाल पुराने स्कूल के दोस्तों (friends) को खोजने और परदेश में रह रहे रिश्ते (relation)दारों से संपर्क बनाने के लिये किया जाता था। हाल के वर्षों में इन्होंने हमारे करीबी संबंधों (relation) के सभी पहलुओं को घेर लिया है, विशेष रूप से हमारे जीवन (life) और संबंधों (relation) को। फेसबुक (facebook) और ट्विटर (twitter) लोगों को उनके दोस्तों (friends) व रिश्ते (relation)दारों की पसंद-नापसंद और सामाजिक दायरे से जोड़ता है। इस पूरे कार्यक्रम में कोई प्रत्यक्ष वार्तालाप या मुलाकात शामिल नहीं होती है। फेसबुक (facebook) पर किसी के बारे में लोग राय उसके द्वारा साझा की गई पोस्ट और टिप्‍पणियों के आधार पर करते हैं।

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छवि प्रदर्शन के आधार पर प्रभाव | Image Effect

सोशल नेटवर्किंग साइट (site) एक ऐसा प्‍लेटफार्म है जिसके द्वारा कोई भी व्‍यक्‍ित अपने विचारों को दूसरे व्यक्ति (person)यों के साथ साझा कर सकता है। फेसबुक (facebook)  और ट्विटर (twitter) अन्‍य व्यक्तियों (person) को हमारे दोस्तों (friends) को देखने की सुविधा देता है। इस बीच कई बार लोगों के विभिन्न समूहों (करीबी दोस्तों (friends), परिवार, परिचितों, मित्रों के मित्रों, सहयोगियों और अजनबियों) को अपनी सही प्रस्तुति में चुनौतियां का सामना करना पड़ता है।

 सोशल नेटवर्किंग साइट के संबंधों पर संभावित खतरे | Possible Risks of Social Media

युवा सोशल नेटवर्किंग साइट्स (sites) का उपयोग ना सिर्फ दोस्त बनाने के लिए बल्कि गर्ल-फ्रेंड और ब्वॉय फ्रेंड ढूंढने के लिए भी खूब कर रहे हैं। इतना ही नहीं सोशल नेटवर्किंग (social networking) आज के जमाने में मैरिज काउंसलर तक की भूमिका में आ गया है। इसके साथ ही यह दो लोगों के आपसी रिश्‍तों (relation) में खटास पैदा करने का कारण भी बन रहा है। फेक प्रोफाइल (profile) इसका एक उदाहरण (example) है। कम उम्र के लड़के और लड़कियों की आदत (habit) होती है कि उत्साह में प्रोफाइल (profile) पर अपनी सभी जानकारी साझा कर देते हैं। प्रोफाइल (profile) पर अपना फोन नंबर, घर का पता या फिर कोई भी प्राइवेट इनफार्मेशन (private information) शेयर करने से कई बार समस्या आ जाती है। ऑन लाइन होने पर कुछ लोग खुद को जैसा प्रदर्शित करते हैं वे वास्तविक जीवन (life) में वैसे नहीं होते। बाद में हकीकत जानने पर रिश्ते (relation) में दरार आने लगती हैं।

अगर आप भी अपना फेसबुक (facebook)  प्रोफाइल (profile) बार-बार चेक करते हैं तो ये आदत (habit) आप पर बुरा असर डाल सकती है। जो लोग अपना फेसबुक (facebook)  प्रोफाइल (profile) ज्यादा देखते हैं, उनके दुखी और अस्वस्थ (unhealthy) रहने की आशंका अधिक होती है। ऐसे लोग कभी-कभार इस सोशल नेटवर्किंग साइट (site) का इस्तेमाल करने वालों के मुकाबले अधिक नुकसान (loss/risk) का सामना कर सकते हैं। यह शोध अमेरिकी पत्रिका एपिडेमियोलॉजी में प्रकाशित (publish) हुआ है।

अमेरिका में सैन डिएगो, कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक शोध में 5,208 लोगों के दो साल के उनके फेसबुक (facebook)  इस्तेमाल के आंकड़ों को इकट्ठा किया। शोधकर्ताओं ने फेसबुक (facebook)  गतिविधि और शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य (health), जीवन (life) में संतुष्टि और बॉडी मास इंडेक्स के साथ वास्तविक दुनिया (real world) की सोशल नेटवर्क गतिविधि की जांच की।

इन आंकड़ों का अध्ययन (research) करने के बाद वैज्ञानिकों ने पाया कि फेसबुक (facebook)  का अधिक इस्तेमाल करना सामाजिक, शारीरिक और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य (health) से समझौता करने से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी में असिस्‍टेंट प्रोफेसर शाक्या (shakya) के मुताबिक, जो लोग सोशल नेटवर्क साइट (site) का ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, उनमें खुश (happy) रहने का स्‍तर कम पाया गया है।

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